Wednesday, May 24, 2006
Tuesday, May 23, 2006
Mallika Sherawat in Unbelivable Clothes.... very Shocking
Saturday, May 20, 2006
Friday, May 19, 2006
Tuesday, May 16, 2006
Monday, May 15, 2006
Amitabh Bachchan
यह तब की बात है जब अमिताभ बच्चन अपनी लम्बी बीमारी के बाद फिर से ठीक हो गए .........
एक दिन सुबह बच्चन साहब ने अपने ड्राइवर से कहा, ‘‘अरे भाई, आज गाड़ी हम चलाएंगे। तुम पीछे बैठ जाओ।’’
ड्राइवर: ‘‘पर साब, आपकी तबियत .....’’
अमिताभ: ‘‘अरे मेरी तबियत बिल्कुल ठीक हो गयी है। क्या नाच के दिखाऊँ, डायलॉग बोलूं या फिर मार-धाड़ करके दिखाउं ..... हांइ’’
फिर बच्चन साहब ने कार चलाना शुरू किया .... बहुत तेज़ ...... जूं...जूं...जूं....जूं
पहले एक लाल बत्ती तोड़ी ....
फिर दूसरी लाल बत्ती तोड़ी ....
फिर कई और लाल बत्तियाँ तोड़ीं .....
...
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...
...
आख़िरकार एक ट्रेफ़िक हवलदार ने कार को रोक लिया और गाड़ी को सड़क के किनारे लगाने को कहा।
हवलदार: ‘‘चलो लाइसेंस दिखाओ, गाड़ी के काग़ज़ात .....’’
फिर उसने अचानक अमिताभ बच्चन को देखा और बोल पड़ा, ‘‘अरे, अमिताभ बच्चन ...’’ वह बच्चन साहब को देख कर आश्चर्यचकित रह गया।
उसने तुरन्त अपने वरिष्ठ अधिकारी को फ़ोन लगाया।
हवलदार: ‘‘सर, आप यहाँ जल्दी आएँ नाके पर ....’’
सर: ‘‘क्यों, क्या हुआ .....’’
हवलदार: ‘‘सर, एक गाड़ी ने सिग्नल तोड़ा है और मैंने उस गाड़ी को साइड में रखा है।’’
सर: ‘‘तो फिर’’
हवलदार: ‘‘उस गाड़ी का मालिक बहुत बड़ा आदमी है सर .... मैं उसका चालान नहीं काट सकता आप ख़ुद यहाँ आइये ....’’
सर: ‘‘कौन मालिक है उस गाड़ी का’’
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हवलदार: ‘‘वो तो पता नहीं सर... पर उसने ने है न सर.... अमिताभ बच्चन को ड्राइवर रखा है।’’
एक दिन सुबह बच्चन साहब ने अपने ड्राइवर से कहा, ‘‘अरे भाई, आज गाड़ी हम चलाएंगे। तुम पीछे बैठ जाओ।’’
ड्राइवर: ‘‘पर साब, आपकी तबियत .....’’
अमिताभ: ‘‘अरे मेरी तबियत बिल्कुल ठीक हो गयी है। क्या नाच के दिखाऊँ, डायलॉग बोलूं या फिर मार-धाड़ करके दिखाउं ..... हांइ’’
फिर बच्चन साहब ने कार चलाना शुरू किया .... बहुत तेज़ ...... जूं...जूं...जूं....जूं
पहले एक लाल बत्ती तोड़ी ....
फिर दूसरी लाल बत्ती तोड़ी ....
फिर कई और लाल बत्तियाँ तोड़ीं .....
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आख़िरकार एक ट्रेफ़िक हवलदार ने कार को रोक लिया और गाड़ी को सड़क के किनारे लगाने को कहा।
हवलदार: ‘‘चलो लाइसेंस दिखाओ, गाड़ी के काग़ज़ात .....’’
फिर उसने अचानक अमिताभ बच्चन को देखा और बोल पड़ा, ‘‘अरे, अमिताभ बच्चन ...’’ वह बच्चन साहब को देख कर आश्चर्यचकित रह गया।
उसने तुरन्त अपने वरिष्ठ अधिकारी को फ़ोन लगाया।
हवलदार: ‘‘सर, आप यहाँ जल्दी आएँ नाके पर ....’’
सर: ‘‘क्यों, क्या हुआ .....’’
हवलदार: ‘‘सर, एक गाड़ी ने सिग्नल तोड़ा है और मैंने उस गाड़ी को साइड में रखा है।’’
सर: ‘‘तो फिर’’
हवलदार: ‘‘उस गाड़ी का मालिक बहुत बड़ा आदमी है सर .... मैं उसका चालान नहीं काट सकता आप ख़ुद यहाँ आइये ....’’
सर: ‘‘कौन मालिक है उस गाड़ी का’’
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हवलदार: ‘‘वो तो पता नहीं सर... पर उसने ने है न सर.... अमिताभ बच्चन को ड्राइवर रखा है।’’
Wednesday, May 10, 2006
Sunday, May 07, 2006
Why British left India?
क्यों छोड़ा अंग्रेज़ों ने भारत?
प्राय: स्वतन्त्रता आन्दोलन में नेहरू जी के योगदान को बहुत कम करके आंका जाता है। लेकिन ये तस्वीरें साफ़ करती हैं कि भारत की स्वतन्त्रता में नहेरू जी का योगदान सबसे ज़्यादा था। नेहरू जी के विरोधी ये तस्वीरें ज़रूर देखें कि किस तरह उन्होनें अंग्रेज़ो और ख़ासकर लॉर्ड माउण्टबेटन पर दबाव बना कर उन्हें भारत से जाने पर मजबूर कर दिया -

प्राय: स्वतन्त्रता आन्दोलन में नेहरू जी के योगदान को बहुत कम करके आंका जाता है। लेकिन ये तस्वीरें साफ़ करती हैं कि भारत की स्वतन्त्रता में नहेरू जी का योगदान सबसे ज़्यादा था। नेहरू जी के विरोधी ये तस्वीरें ज़रूर देखें कि किस तरह उन्होनें अंग्रेज़ो और ख़ासकर लॉर्ड माउण्टबेटन पर दबाव बना कर उन्हें भारत से जाने पर मजबूर कर दिया -

Saturday, May 06, 2006
क्यों घबराता है चीन ‘बुश’ से
यह पहली तस्वीर चीन के राष्ट्रपति की अमरीका यात्रा के दौरान ली गयी।
और यह दूसरी तस्वीर बुश की चीन यात्रा के दौरान खींची गयी।
Friday, May 05, 2006
Bollywood Starlet Tamanna Bhatia (1)
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Thursday, May 04, 2006
भारत का नरक
एक आदमी मर कर नरक पहुँचा और वहाँ जा कर उसने देखा कि हर देश के लिए एक अलग नरक है। सबसे पहले वह जर्मन नरक में गया और पूछा, ‘‘यहाँ क्या होता है?’’ क़तार में खड़े एक इंसान ने जवाब दिया, ‘‘पहले यहाँ एक घण्टे तक इलेक्ट्रिक चेयर पर बिठाया जाता है, फिर अगले एक घण्टे तक कीलों की सेज पर लेटाया जाता है। उसके बाद एक जर्मन शैतान आकर बाक़ी सारा दिन पीटता रहता है।’’
उस आदमी को यह सब सुन कर अच्छा नहीं लगा और वह आगे बढ़ गया। फिर उसने जाकर अमरीकी नरक, रूसी नरक और बहुत-से दूसरे नरक भी देखे। उसने पाया कि ये सभी नरक भी कमोबेश जर्मन नरक की ही तरह हैं।
फिर अन्तत: वह भारतीय नरक में आया और अन्दर जाने का इन्तज़ार कर रहे लोगों की एक लम्बी क़तार देखी। आश्चर्यचकित हो कर उसने पूछा, ‘‘यहाँ पर क्या होता है?’’ वहाँ खड़े एक आदमी ने बताया, ‘‘पहले यहाँ एक घण्टे तक इलेक्ट्रिक चेयर पर बिठाया जाता है, फिर अगले एक घण्टे तक कीलों की सेज पर लेटाया जाता है। उसके बाद एक हिन्दुस्तानी शैतान आकर बाक़ी सारा दिन पीटता रहता है।’’
‘‘लेकिन ये सब तो दूसरे सभी नरकों में भी होता है। फिर इतने सारे लोग इस नरक में क्यों जाना चाहते हैं?’’
‘‘क्योंकि यहाँ देख-रेख की कमी की वजह से सभी चीज़ों की हालत ख़राब है। इलेक्ट्रिक चेयर काम नहीं करती, किसी ने ‘कीलों की सेज’ से सारी कीलें चुरा ली हैं और शैतान एक पूर्व सरकारी अधिकारी है; वह आता है, रजिस्टर में दस्तख़त करता है और कैण्टीन में चला जाता है!!!!!’’
उस आदमी को यह सब सुन कर अच्छा नहीं लगा और वह आगे बढ़ गया। फिर उसने जाकर अमरीकी नरक, रूसी नरक और बहुत-से दूसरे नरक भी देखे। उसने पाया कि ये सभी नरक भी कमोबेश जर्मन नरक की ही तरह हैं।
फिर अन्तत: वह भारतीय नरक में आया और अन्दर जाने का इन्तज़ार कर रहे लोगों की एक लम्बी क़तार देखी। आश्चर्यचकित हो कर उसने पूछा, ‘‘यहाँ पर क्या होता है?’’ वहाँ खड़े एक आदमी ने बताया, ‘‘पहले यहाँ एक घण्टे तक इलेक्ट्रिक चेयर पर बिठाया जाता है, फिर अगले एक घण्टे तक कीलों की सेज पर लेटाया जाता है। उसके बाद एक हिन्दुस्तानी शैतान आकर बाक़ी सारा दिन पीटता रहता है।’’
‘‘लेकिन ये सब तो दूसरे सभी नरकों में भी होता है। फिर इतने सारे लोग इस नरक में क्यों जाना चाहते हैं?’’
‘‘क्योंकि यहाँ देख-रेख की कमी की वजह से सभी चीज़ों की हालत ख़राब है। इलेक्ट्रिक चेयर काम नहीं करती, किसी ने ‘कीलों की सेज’ से सारी कीलें चुरा ली हैं और शैतान एक पूर्व सरकारी अधिकारी है; वह आता है, रजिस्टर में दस्तख़त करता है और कैण्टीन में चला जाता है!!!!!’’
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